ग्रामीण उद्यमियों के लिए आकृति प्रौद्योगिकी पैकेज
(आकृति प्रौद्यो पैक - ए.टी.पी.)

परिचय

परमाणु ऊर्जा विभाग (पऊवि) द्वारा गैर-विद्युत अनुप्रयोगों (एनपीए) और व्युत्पन्न (स्पिन-ऑफ) प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने के लिए पऊवि-सामाजिक पहल का प्रारंभ किया गया है। इसके अंतर्गत जल, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि-भूमि सुधार के क्षेत्र में शहरी और ग्रामीण अपशिष्ट का प्रबंधन किया जाता है। इस प्राधार के अंदर, “आकृति-कृतिक-फोर्स (AKRUTI-KRUTIK-FORCE)” नामक संरचित कार्यक्रम का संरूपण भापअ केंद्र, ट्रॉम्बे, मुंबई द्वारा किया गया है। इसे परमाणु ऊर्जा विभाग के दृष्टि-बोध के अधीन लागू किया गया है, जिससे इसकी पहुँच समाज तक हो सके एवं समाज में जागरूकता उत्पन्न की जा सके।

यह कार्यक्रम आरंभ से ही आकृति कार्यक्रम के रूप में आम तौर से जाना जाता है। आकृति शब्द अँग्रेजी में प्रगत ज्ञान तथा ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्यान्वयन (एडवान्स्ड नोलेज एन्ड रूरल टेक्नोलॉजी इंप्लीमेंटेशन) संबंधी पहल का परिवर्णी शब्द है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत, महाराष्ट्र राज्य में तीन आकृति निस्पंद (नोड) स्थापित किए गए थे, जिन्हें महाराष्‍ट्र सरकार के वित्त-पोषण से संचालित किया गया था तथा इसके अनुवर्तन में, कुछ अन्य निस्पंद (नोड) की स्थापना अन्य राज्यों में दूसरे गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने वित्त-पोषण स्वयं करते हुए की थी।

ग्रामीण क्षेत्र से अवसंरचना, मानव संसाधन, वित्तीय सहायता।
भापअ केंद्र से प्रौद्योगिकी और तकनीकी संबंधी मार्गदर्शन।
आकृति : ग्रामीण विकास कार्यक्रम सहित

ग्रामीण उद्यमियों के लिए आकृति प्रौद्योगिकी पैकेज

कार्यकारी सिद्धांत
1. ग्रामीण क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी स्थापित करना।
2. ग्रामीणों के लिए इसका प्रदर्शन एवं इसे सुकर बनाना।
3. खेतों में संविरचन, संयोजन एवं परिनियोजन करना और इसका विस्तार करना।

काम करें, कमाएँ और योगदान दें।
गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से आकृति निस्पंदों (नोडों) ने ग्रामीण क्षेत्र के लिए भापअ केंद्र की उन प्रौद्योगिकियों की उपयोगिता प्रदर्शित (निरूपित) की है, जिनसे समाज को लाभ पहुँचता है। इसके अलावा, यह भी प्रदर्शित किया है कि ग्रामीण क्षेत्रक में तकनीकी रूप से अभिविन्यस्त मानव संसाधन में इतना सामर्थ्य है कि भापअ केंद्र वैज्ञानिकों और अभियंताओं (इंजीनियरों) के मार्गदर्शन में, इन प्रौद्योगिकियों का परिनियोजन करके इनका उपयोग कर सके।

इस कार्यक्रम में भापअ केंद्र प्रौद्योगिकियों पर आधारित ग्राम-तकनीकी-उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की क्षमता है।

ग्रामीण क्षेत्रक में इस गतिविधि की व्यापकता और विशाल जनसंख्या पर विचार करते हुए, इसके बहुत बड़े विषय-क्षेत्र के समावेशन हेतु यह आवश्‍यक है कि ग्रामीण मानव संसाधन को प्रशिक्षित करने के लिए प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण सुविधाएँ स्थापित की जाएँ और इसके बदले में, वे अन्य ग्रामीण संसाधनों का विकास करने के कार्य से जुड़ें। इस तरह, ग्रामीण मानव संसाधन विकास सुविधा की स्थापना श्री विठ्ठल एजुकेशन एन्ड रिसर्च इन्स्टीट्यूट (एस.वी.ई.आर.आई.), पंढरपुर, महाराष्ट्र के परिसर में की गई है, जो पऊवि बाह्य-पहुँच केंद्र के रूप में कार्य करता है। इसे महाराष्ट्र सरकार की वित्‍तीय सहायता से तथा भापअ केंद्र/ पऊवि के मार्गदर्शन में स्थापित किया गया है।

गाँवों में तकनीकी-उद्यमियों को बढ़ावा देना
प्रभार्य के आधार पर अनन्य ग्रामीण परिनियोजन हेतु 'आकृति प्रौद्यो-पैक' (ए.टी.पी.): यह तकनीकी रूप से अभिविन्यस्त इच्छुक व्यक्तियों के लिए ऐसा प्रौद्योगिकी पैकेज है, जो किफायती मूल्य पर आकृति कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रक में तकनीकी-आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देता है। इसमें गाँव और शहर की/के महिला उद्यमी/ उद्योग/ संगठन/ धारा 8 से संबंधित कंपनियाँ/ बड़े व्यावसायिक घराने/ गैर सरकारी संगठन/ ग्राम संगठन/ न्यास (ट्रस्ट)/ विश्वविद्यालय/ महाविद्यालय शामिल हैं। 12वीं योजनागत परियोजना के तहत इस विषय-क्षेत्र में नई प्रौद्योगिकियाँ, परामर्श, बेहतर प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी परिनियोजन की नई योजनाएँ जोड़ते हुए निरंतर इसका विस्तार किया गया है ।

क. आकृति प्रौद्यो पैक का आरूप (फॉरमेट)
आकृति प्रौद्यो पैक में 15* (पंद्रह) प्रौद्योगिकियाँ और 3* (तीन) परामर्श सेवाएँ हैं, जो नीचे दी गई हैं:

क.1) प्रौद्योगिकियाँ

क्रम संख्‍या

प्रौद्योगिकी

लाइसेंस शुल्क रू. में

1

जैव-निम्ननीय अपशिष्‍ट पर आधारित निसर्गऋण: जैव गैस (बायोगैस) संयंत्र (बीजीपी)

12500

2

मृदा जैव कार्बन संसूचन एवं परीक्षण किट (एस..सी.डी.टी.के.): किसान द्वारा खेत की मिट्टी में जैव कार्बन के अंश का आकलन स्वयं करने के लिए कम लागत वाला उपयोगकर्ता के प्रति मित्रवत किट।

10000

3

कंप-तापीय-विग्रसित्र (वीटीडी): घुन से खाद्यान्न बचाने के लिए कंप-तापीय-विग्रसित्र (वीटीडी) का उपयोग किया जाता है। इससे इनकी निधानी आयु एक वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।

5000

4

वलनीय  सौर शुष्‍कित्र (एफ.एस.डी.): किशमिश-मुनक्का बनाने और अंगूर, कटहल के गूदे, अदरक, हरी मिर्च, जड़ी-बूटियों से निर्मित दवाएँ, आदि सुखाने के लिए उपयोग हेतु प्रयुक्त वलनीय सौर शुष्‍कित्र

2500

5

फलों के छिलके का रंग ताजा कायम रखने और लीची की निधानी आयु बढ़ाने के लिए प्रक्रम: यह अभिनव प्रक्रम है, जिसमें उपचार के बाद फलों को कम तापमान पर 45 दिनों तक भंडारित किया जा सकता है।

25000

6

घरेलू जल शोधित्र (डी.डब्ल्यू.पी.): बिना बिजली का उपयोग किए बैक्टीरिया मुक्त स्वच्छ पेयजल प्राप्त करने की प्रौद्योगिकी।

25000

7

खारा पानी प्रतिलोम परासरण (बी.डब्ल्यू.आर..) प्रौद्योगिकी: सौर ऊर्जा चालित सुबाह्य (पोर्टेबल) घरेलू खारा पानी प्रतिलोम परासरण (बी.डब्ल्यू.आर.ओ.) प्रौद्योगिकी।

12500
रोक कर रखा हुआ

8

डुबाएँ और पिएँ (डी.एन.डी.) झिल्‍ली थैली: यह प्रौद्योगिकी जैविक रूप से संदूषित जल को रोगाणु-रहित घोल में परिवर्तित करती है, जिसे पिया जा सकता है।

5000
रोक कर रखा हुआ

9

व्यावसायिक रूप से केले की महत्वपूर्ण किस्मों के व्यापक उत्पादन के लिए केले के ऊतक संवर्धन (बी.टी.सी.) की प्रौद्योगिकी: इस  प्रौद्योगिकी का उपयोग वांछित पैमाने तक केले की ऐसी किस्मों का संरक्षण और गुणन करने के लिए भी किया जा सकता है, जो स्थानीय रूप से महत्वपूर्ण कतिपय अन्य किस्में हैं, अभिजात वर्ग वाली हैं, लुप्तप्राय हैं और सजावटी हैं।

25000

10

जैव-कवकनाशी ट्राइकोडर्मा spp का बृहत् गुणन माध्यम: यह ट्राइकोडर्मा spp की तीव्र वृद्धि के लिए कम लागत वाला बृहत् गुणन माध्यम है, जो जैव-कवकनाशी की बेहतर वृद्धि के लिए आलंब प्रदान करता है।  

5000

11

परिष्कृत सूक्ष्म नीम जैव-पीड़कनाशी: यह अभिनव जैव-पीड़कनाशी है, जिसका उपयोग पूर्ण निंबोलियों के साथ अन्य आयुर्वेदिक जड़ी बूटियाँ सम्मिश्रित करते हुए परिष्कृत सूक्ष्म धूलि के रूप में किया जाता है। यह लंबे समय तक अनवरत तरीके से जैव-पीड़कनाशी का निस्सरण करता है। 

20000

12

नैनो-मिश्र परा-निस्यंदन झिल्ली युक्ति (डिवाइस): यह घरेलू पेयजल के शोधन के लिए जल उपचार प्रौद्योगिकी (डब्ल्यू.आर.टी.) है। इस युक्ति का प्रयोजन आर्सेनिक, लौह और सूक्ष्मजीवी संदूषणों का पता लगाना है। इसमें बिजली की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

25000

13

खाने-हेतु-तैयार (आरटीई) मध्‍य स्तरीय नमी (आईएम) वाले फलों के चिरस्थाई घन (क्यूब) हेतु प्रक्रम: यह प्रौद्योगिकी मध्‍य स्तरीय नमी वाले फलों के घन (क्यूब) तैयार करने के लिए, फलों नामत: आम, केला, पपीता, अनन्नास और सेब के प्रक्रम के विकास से संबंधित है। इससे इनकी निधानी आयु बढ़ती है, कटाई के बाद का नुकसान कम होता है, इनकी उपलब्धता हमेशा बनाए रखना सुनिश्चित किया जा सकता है तथा यह निर्यात को भी बढ़ावा देता है। 

10000

14

शुष्क पर्ण (सूखा पत्ता), रसोई-अपशिष्ट और मंदिर-अपशिष्ट के अपघटन हेतु क्षिप्र मिश्र-खादन प्रौद्योगिकी। ट्राइकोडर्मा कोनिंगियोप्सिस पर आधारित सूत्रीकरण के अनुप्रयोग द्वारा सूखे पत्तों , रसोई-अपशिष्ट और मंदिर-अपशिष्ट का मिश्र-खाद बनाया जाता है। इससे जनित(उत्पन्न) मिश्रखाद में उच्च जैव कार्बन का अंश होता है।

12500

15

25 किलोग्राम का सौर शुष्‍कित्र: यह सौर पैनल से एक साथ बिजली का उत्पादन करने तथा शुष्‍कित्र में संस्थापित पंखों से प्रेरित प्रवात उत्पन्न करते हुए उत्पाद को त्वरित तरीके से सुखाने पर आधारित है।

5000

. 2) परामर्श:
1. किरणन द्वारा कृषि उत्पादों का परिरक्षण:
विकिरण संसाधन के विषय में गाँवों में जागरूकता लाने तथा उसका लाभ दिलाने के लिए, कृषि उत्‍पादों का किरणन करने हेतु परामर्श सेवा उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे उत्पादों के सीमित मात्रा वाले नमूने का नि:शुल्‍क परीक्षण करने (परखने) के तौर पर आकृति-प्रौद्यो-पैक (ए.टी.पी.) धारक पृथक से अनुरोध करके एक बार इस परामर्श सेवा का लाभ उठा सकते हैं।

2. भापअ केंद्र के नए बीज:
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित बीजों की नई किस्मों का प्रसार बढ़ाने के लिए, आकृति-प्रौद्यो-पैक (ए.टी.पी.) धारक द्वारा पृथक से अनुरोध करने पर उन्हें उनके क्षेत्र की उपयुक्तता के अनुसार बीज के नमूने उपलब्ध कराए जाएँगे।

3. जल संबंधी अन्वेषण में समस्थानिक (आइसोटोप) तकनीकों का अनुप्रयोग:
पिछले कुछ वर्षों में, जल संसाधन के प्रबंधन के लिए सशक्त औजार प्रदान करने वाले अपरिहार्य विषय के रूप में नाभिकीय तकनीकियाँ विकसित हुई हैं। समस्थानिक (आइसोटोप) तकनीकों के अनुप्रयोग के लिए भारत की जलवायु और जल संबंधी विविधता असीमित अवसर उपलब्‍ध कराती हैं; चाहे शुष्क राजस्थान हो, हिमालय का पर्वतीय क्षेत्र हो, तटीय ओड़िशा और पश्चिम बंगाल हो, गंगा के मैदानों के जलोढ़ निक्षेप हो, शहरी केंद्र हों या प्रायद्वीपीय भारत की कठोर चट्टान हो। जल संबंधी अन्वेषण में समस्थानिक (आइसोटोप) तकनीक जैसी वैज्ञानिक विधियों के उपयोग के बारे में जागरूकता लाने के लिए, आकृति-प्रौद्यो-पैक (ए.टी.पी.) धारक द्वारा पृथक से अनुरोध करने पर उनके क्षेत्र की उपयुक्तता के अनुसार उन्हें प्रारंभिक परिचय दिया जाएगा।

). आकृति प्रौद्यो पैक लाइसेंस शुल्क:
गाँवों को तकनीकी-उद्यमिता में समर्थ बनाने और प्रोत्साहित करने के लिए, वहाँ इससे संबंधित गतिविधि शुरु करने के इच्छुक सभी लोग ये प्रौद्योगिकियाँ किफायती लागत पर प्राप्त कर सकते हैं। इस गतिविधि का आरंभ शीघ्र करने के लिए, अपने क्षेत्र में उपयुक्‍तता को देखते हुए वे कुछ उत्पादों की खरीद या तो कार्यरत (प्रचालित) आकृति केंद्रों से या उद्योगों से करके उन्हें परिनियोजित कर सकते हैं। 

वे अपने अर्जित अनुभव के आधार पर, इन गतिविधियों का प्रसार आस-पास के गाँवों में कर सकते हैं। इनका परिनियोजन करने के लिए इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदत्त तकनीकी जानकारी तथा प्रशिक्षण संबंधी आलंब के साथ, वे स्थानीय तकनीकी-उद्यमिता के जरिए ग्रामीण क्षेत्रक में इनका परिनियोजन कर सकते हैं।

परमाणु ऊर्जा विभाग-सामाजिक पहल के अंतर्गत, ग्रामीण क्षेत्रक में संभाव्य (संभावित) तकनीकी-उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और बड़े पैमाने पर भापअ केंद्र प्रौद्योगिकियों के परिनियोजन को बढ़ावा देने हेतु, ग्रामीण क्षेत्रों के स्थानीय लोगों को ग्रामीण क्षेत्र में इन प्रौद्योगिकियों का परिनियोजन करने के लिए इसे रियायती लाइसेंस शुल्क पर दिया जाता है और शहरी उद्यमियों को भी ग्रामीण क्षेत्र में यह गतिविधि आरंभ करने के लिए किफायती मूल्य पर प्रदान किया जाता है। ऊपर वर्णित सभी प्रौद्योगिकियाँ आकृति प्रौद्यो पैक के अंतर्गत दी जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रक में परिनियोजन करने के लिए, अपने क्षेत्र की आवश्यकता और अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार, आवेदक किसी एक या सम्मिश्रित प्रौद्योगिकियों का चयन करने के लिए स्वतंत्र है।  

आकृति-प्रौद्यो-पैक (ए.टी.पी.) धारक द्वारा प्रौद्योगिकियाँ ले कर ग्रामीण क्षेत्रक में सफलतापूर्वक परिनियोजित कर लिए जाने पर, वह परीक्षण करने (परखने) के तौर पर अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्त निम्‍नलिखित नि:शुल्‍क परामर्श के लिए अनुरोध कर सकता है।

1.  किरणन से कृषि उत्पाद का परिरक्षण:

विकिरण प्रौद्योगिकी का उपयोग विभिन्न मामलों में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है, जैसे कृषि उत्पादों का परिरक्षण करने में, खाद्य संरक्षा में सुधार करने में और कृषि उत्‍पाद में संगरोध कीट पीड़क और रोगाणुओं की उपस्थिति से होने वाली व्यापार संबंधी बाधाओं पर काबू पाते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ाने में। इनसे मिलने वाले प्रमुख प्रौद्योगिक लाभ हैं कीट पीड़क से मुक्ति (वि-ग्रसन), अंकुरण का संदमन, शीघ्र पक कर खराब होने वाली सामग्री के पकने में विलंब कराना और खाद्य पदार्थ नष्ट करने वाले रोगाणुओं का विनाश करना। इससे भंडारण काल, स्वच्छता और संरक्षा में वृद्धि होती है। यह वाँछित है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रकों में इन लाभों के बारे में जागरूकता लाई जाए।
ग्रामीण क्षेत्रक में यह जागरूकता लाने के लिए, आकृति प्रौद्यो पैक के धारकों द्वारा पृथक से अनुरोध करने पर, उन्हें विकिरण संसाधन परामर्श सेवा प्रदान की जाएगी, जिससे वे अपने क्षेत्रों में उपलब्ध उत्पादों के किरणन संबंधी नमूनों पर नि:शुल्क परीक्षण (परख) कर सकें।

2.  भापअ केंद्र के नए बीज:

भापअ केंद्र द्वारा विकसित नई किस्मों के बारे में जागरूकता लाने और उनका प्रसार बढ़ाने के लिए, आकृति-प्रौद्यो-पैक (ए.टी.पी.) धारक द्वारा पृथक से अनुरोध करने पर उन्हें बीज का नमूना अपने क्षेत्र में बोने के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

3. जल संबंधी अन्वेषण में समस्थानिक (आइसोटोप) तकनीकों का अनुप्रयोग:
जल से संबंधित समस्याओं का निदान करने और जल संसाधनों का प्रबंधन करने में समस्थानिक (आइसोटोप) तकनीक अत्यंत उपयोगी है।
सामाजिक अनुप्रयोगों के लिए ऐसी खोजों के विषय में रुचि रखने वाले किसी भी आकृति-प्रौद्यो-पैक (ए.टी.पी.) धारक द्वारा भापअ केंद्र के विशेषज्ञों को प्रारंभिक खोज करने, पानी के नमूनों का संग्रह करने और अन्य क्षेत्रों का दौरा करने के दौरान संभार (सुप्रचालन) संबंधी सुविधाएँ और आवश्यक मानव संसाधन (एचआर) दिया जाएगा। प्रारंभिक खोज के समय, पर्यावरणीय समस्थानिक (आइसोटोप) और रासायनिक प्रजातियों के लिए जल के इन नमूनों का मापन इसके आँकड़ों और परिणामों के निर्वचन के साथ भापअ केंद्र में किया जाएगा।

जल संबंधी अन्वेषण में समस्थानिक (आइसोटोप) तकनीकों के उपयोग हेतु वैज्ञानिक विधियों के बारे में जागरूकता लाने के लिए, आकृति-प्रौद्यो-पैक (ए.टी.पी.) धारक द्वारा पृथक से अनुरोध करने पर उनके क्षेत्र में इनकी उपयुक्तता के अनुसार प्रारंभिक परिचय दिया जाएगा। उपर्युक्‍त प्रारंभिक मापन करने के इच्छुक तथा यह सुविधा स्थापित करने में, अधिमानत: अपने परिसर में स्थापित करने में, रुचि रखने वाले संस्थानों को भापअ केंद्र में इसका परिचय और मार्गदर्शन दिया जाएगा।

). आकृति प्रौद्यो पैक हेतु महिला उद्यमियों के लिए प्रोत्साहन पैक:
महिला उद्यमियों (डब्ल्यू.ई.) को आकृति प्रौद्यो पैक के लाइसेंस शुल्क पर अतिरिक्त 10% रियायत प्रदान करके और-अधिक प्रोत्साहित किया जाता है, जिसमें अन्य शर्तें पूर्ववत रहती हैं।
 
).  पात्रता का मापदंड:

  • ये प्रौद्योगिकियाँ परिनियोजित करने के इच्छुक व्यक्ति की तकनीकी प्रवृत्ति या पृष्ठभूमि होनी चाहिए तथा गाँव में उसके पास कार्यकारी स्थान/ कार्य-स्थल/ कृषिभूमि होनी चाहिए।
  • यदि कृषि कार्य करने वाले ग्रामीणों के पास इन गतिविधियों को बढ़ाने का विषय-क्षेत्र हो या वे इनका संवर्धन करने के लिए तैयार हों तथा वे अपनी वित्तीय सहायता कर सकते हों/ धन की व्यवस्था कर सकते हों,  तो उन्‍हें वरीयता दी जाएगी।
  • आकृति प्रौद्यो पैक पर आधारित गतिविधियाँ गाँवों में आरंभ करने के इच्छुक शहर के रहवासी पर भी विचार किया जाएगा, बशर्ते गाँव में उनके पास कार्यकारी स्थल के रूप में  स्थान/ कार्यस्थल/ कृषिभूमि उपलब्ध हो।
  • ग्रामीण परिनियोजन करने के लिए आकृति प्रौद्यो पैक अवर्जित (असीमित) आधार पर दिया जाता है।

). आकृति प्रौद्यो पैक का परिनियोजन करने की शर्तें:
• ग्रामीण क्षेत्रक में ग्रामीण जनशक्ति के साथ वास्तव में परिनियोजित किया जाएगा।
• इससे संबंधित गतिविधि करने का स्‍थान ग्रामीण क्षेत्रक में ही होना चाहिए, जिससे ग्रामीणों को रोजगार और उद्यमिता का अवसर उपलब्‍ध हो सके।
• निसर्गऋण को छोड़ कर अन्य मामलों में ग्रामीण क्षेत्रक में ही कार्यकारी स्‍थल बनाया जाएगा/ तत्संबंधी सुविधा की स्थापना की जाएगी तथा इसे पूर्व शर्तों के साथ किया जाएगा, जैसा नीचे दिया गया है।
• निसर्गऋण की स्थापना गाँवों और शहरी क्षेत्रक दोनों में की जा सकती है। ग्रामीण क्षेत्रक में प्रथम (1ला) संयंत्र स्थापित करने के बाद ही शहरी क्षेत्रक में निसर्गऋण संबंधी गतिविधि आरंभ की जा सकती है। 
• ग्रामों (गाँवों) में बने उत्पादों से ग्राम संबंधी आवश्यकताएँ पूरा करने के साथ-साथ इनका विपणन शहरी क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।
• आकृति प्रौद्यो पैक लेने वाले वैयक्तिक उद्यमी/ उद्योग/ कंपनी/ शिक्षा संस्थान/ संगठन द्वारा अन्य गाँवों में प्रौद्योगिकियों का परिनियोजन उपर्युक्त शर्तों के साथ किया जा सकता है तथा इसे वे “आकृति-कृतिक-फोर्स” के उपयुक्‍त आरूप (फार्मेट) के माध्‍यम से या उन गाँवों में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से कर सकते हैं।

). प्रशिक्षण की सुविधा:
पऊवि-बाह्य पहुँच केंद्र (डीएई-ओआरसी) की स्थापना सामाजिक अनुप्रयोगों के लिए की गई है। इसकी स्थापना श्री विट्ठल एजुकेशन एन्ड रिसर्च इन्स्टीट्यूट, पंढरपुर, महाराष्ट्र; राजीव गाँधी विज्ञान और प्रौद्योगिकी आयोग, महाराष्ट्र सरकार; और राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र (एन.आई.सी.), नई दिल्ली के सहयोग से की गई है तथा यह संस्थान के उच्चतर शिक्षा परिसर में सह-अवस्थित है।पऊवि-बाह्य पहुँच केंद्र (डीएई-ओआरसी) में स्थित एक इकाई, नामत: ग्रामीण मानव तथा संसाधन विकास सुविधा, द्वारा आकृति प्रौद्यो पैक की कुछ प्रौद्योगिकियों का प्रशिक्षण इच्छुक उद्यमियों को किफायती प्रभार-राशि पर प्रदान किया जाता है।  

आकृति कार्यक्रम की संवृद्धि और उसके व्यापक प्रसार के लिए, 12वीं योजना परियोजना के अंतर्गत देश के विभिन्न भागों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनका नाम परमाणु ऊर्जा विभाग प्रौद्योगिकी प्रदर्श व प्रसार सुविधा रखा गया है। ये केंद्र/ संस्थान हैं:

  • श्री लाल बहादुर शास्त्री (एसएलबीएस) इंजीनियरिंग कॉलेज, जोधपुर, राजस्थान।
  • श्री जगदगुरु चंद्रशेखरनाथ स्वामीजी (एसजेसी) इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एसजेसीआईटी), चिकबलापुर, कर्नाटक।
  • अनु बोस इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी, पलौंचा, जिला खम्मम, तेलंगाना।
  • राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), तिरुचिरापल्ली (त्रिची), तमिलनाडु।
  • रायपुर इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी, रायपुर।
  • स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर साइन्सेज एन्ड रूरल डेवलेपमेन्ट (एसएएसआरडी), नागालैंड विश्वविद्यालय, मेदज़िफेमा परिसर।
  • मणिपुर साइन्स एन्ड टैक्नोलॉजी काउन्सिल (एमएएसटीईसी),
    [संपर्क: निदेशक, एमएएसटीईसी, इंफाल, पिन -795001]
  • हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्‍वविद्यालय, उत्तराखंड
  • गाँधी इन्स्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी एन्ड मेनेजमेन्ट (पूर्व गीतम यूनीवर्सिटी), विशाखापट्टनम, आँध्र प्रदेश [पुन:स्थापन तथा पुनर्वास कॉलोनी (आर एन्ड आर कॉलोनी), दिब्बपलेम (Dibbapalem) में प्रौद्योगिकी प्रदर्श एवं प्रसार केंद्र]
  • उत्कल बिश्‍वबिद्यालय, भुबनेश्‍वर, ओड़िशा (पऊवि-बाह्य पहुँच केंद्र, बाणी बिहार परिसर, भुबनेश्‍वर, ओड़िशा)

संपर्क: कुलसचिव (रजिस्ट्रार), उत्कल बिश्वबिद्यालय
). आवेदन की क्रियाविधि:
निम्न वर्गों के अनुसार दो पृथक-पृथक आवेदन प्रपत्र उपलब्ध हैं :
1. कंपनियों/ संगठनों/ शिक्षा संस्थानों/ ग्राम संगठनों/ धारा 8 से संबंधित कंपनियों/ न्यासों (ट्रस्टों) के लिए ।
2. व्यक्तियों/ व्यक्तियों के समूहों/ महिला उद्यमियों के लिए।
कृपया विधिवत भरा हुआ आवेदन-प्रपत्र आवेदन के प्रक्रमण के शुल्‍क सहित भेजें। यह शुल्क ‘लेखा अधिकारी, भापअ केंद्र’ के नाम से मुंबई में देय रू. 500/- के माँग-ड्राफ्ट (डिमांड ड्राफ्ट)/ चैक के रूप में होना चाहिए।
आवेदन प्रपत्र अध्‍यक्ष, आकृति प्रौद्योगिकी अनुभाग, भापअ केंद्र, ट्रॉम्बे, मुंबई -400085 को भेजे जाएँ।
आवेदन प्रपत्र निम्नलिखित वेबसाइट से प्राप्‍त किया जा सकता है :
http://www.barc.gov.in/akruti-tp/application.html

विस्‍तृत विवरण हेतु निम्नलिखित से संपर्क करें:
अध्‍यक्ष,
आकृति प्रौद्योगिकी अनुभाग (एकेटीएस)
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र,
ट्रॉम्बे, मुंबई - 400 085.
फैक्‍स: +91-22-25505151/25505150
ई-मेल : akruti@barc.gov.in
दूरभाष : 022 25593896  इसमें ध्वनि-संदेश की सुविधा उपलब्ध है।
यह कार्यालय शनिवार, रविवार एवं राजपत्रित अवकाशों के दिन बंद रहता है।

ग्रामीण मानव तथा संसाधन विकास सुविधा (आर.एच.आर.डी.एफ.),
पऊवि-बाह्य पहुँच केंद्र (डीएई-ओआरसी), पंढरपुर

ग्रामीण उद्यमियों के लिए आकृति प्रौद्योगिकी पैकेज

अधिक जानकारी के लिए निम्नलिखित से संपर्क करें  :

संपर्क : निदेशक, महाराष्ट्र नॉलेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड - नॉलेज फाउंडेशन
दूरभाष : + 91-20-40114551; COO@mkclkf.org
www.mkcl.org
महाराष्ट्र नॉलेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पंजीकृत कार्यालय)
आईसीसी ट्रेड टॉवर, ए स्कंध, 5वीं मंजिल (फ्लोर), सेनापति बापट मार्ग, शिवाजी नगर, पुणे 411 016, महाराष्ट्र, भारत।

क्षेत्र (फील्ड) कार्यालय – परियोजना कार्यपालक
चलभाष : 9665623356;
ई-मेल : gajendrak@mkclkf.org
ग्रामीण मानव तथा संसाधन विकास सुविधा, पऊवि-बाह्य पहुँच केंद्र (डीएई-ओआरसी), श्री विट्ठल एजुकेशन एन्ड रिसर्च इन्स्टीट्यूट (एस.वी.ई.आर.आई.) के परिसर में (sveri.ac.in), गोपालपुर, पंढरपुर, जिला – सोलापुर - 413304 महाराष्‍ट्र ।

आकृति-प्रौद्यो-पैक (ए.टी.पी.) के अंतर्गत प्रौद्योगिकियाँ एवं परामर्श-कार्य

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अधिक जानकारी के लिए निम्नलिखित से संपर्क करें:
अध्‍यक्ष,
आकृति प्रौद्योगिकी अनुभाग (.के.टी.एस.)
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र,
ट्रॉम्बे, मुंबई – 400 085
ईमेल: akruti@barc.gov.in
दूरभाष: 022 25593896